निर्मला सप्रे सदस्यता केस पर हाईकोर्ट सख्त, देरी पर उठे सवाल

Thu 30-Apr-2026,01:26 PM IST +05:30

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निर्मला सप्रे सदस्यता केस पर हाईकोर्ट सख्त, देरी पर उठे सवाल Nirmala-Sapre-MLA-Membership-Case-MP-High-Court-Hearing
  • बीना विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता पर हाईकोर्ट सख्त, दलबदल मामले में 90 दिन की समयसीमा पर उठाए गंभीर सवाल।

  • उमंग सिंघार की याचिका पर सुनवाई, कांग्रेस व्हिप का हवाला देकर विधायक पक्ष ने अपनी वैधानिक स्थिति बनाए रखने का दावा किया।

  • 720 दिनों की देरी पर कोर्ट नाराज, अगली सुनवाई 18 जून को, विधानसभा स्पीकर की कार्रवाई पर टिकी सभी की नजरें।

Madhya Pradesh / Bhopal :

Bhopal/ बीना विधायक निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ती नजर आ रही है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने दलबदल मामले में देरी को लेकर कड़ी नाराजगी जताई।

सुनवाई के दौरान विधायक पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि 27 अप्रैल को हुए विशेष सत्र में कांग्रेस द्वारा जारी व्हिप का पालन करते हुए निर्मला सप्रे सदन में उपस्थित रहीं। इस आधार पर उन्होंने दावा किया कि विधायक अभी भी वैधानिक रूप से कांग्रेस पार्टी का हिस्सा हैं।

वहीं अदालत ने दलबदल मामलों में निर्णय लेने की समयसीमा को लेकर गंभीर सवाल उठाए। चीफ जस्टिस संजीव कुमार सचदेवा की बेंच ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार ऐसे मामलों का निपटारा 90 दिनों के भीतर किया जाना चाहिए। इसके बावजूद यह मामला लगभग 720 दिनों तक लंबित रहना न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।

राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने अदालत को आश्वस्त किया कि विधानसभा स्पीकर इस मामले में विधिवत सुनवाई कर रहे हैं और प्रस्तुत साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है।

दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के वकील विभोर खंडेलवाल ने कोर्ट से मांग की कि सुप्रीम कोर्ट की समयसीमा का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की गरिमा बनी रहे।

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस को विधानसभा स्पीकर के संज्ञान में लाया जाए और मामले के जल्द निपटारे की दिशा में कार्रवाई की जाए।

अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 18 जून को होगी, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यह मामला न केवल एक विधायक की सदस्यता बल्कि राज्य की राजनीतिक स्थिति और संवैधानिक प्रक्रिया के लिए भी महत्वपूर्ण बन गया है।